Kaal Sarp Dosp Puja

Maha Mrityunjaya Mantra Jaap

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् । उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॥ इस मंत्र का हिंदी अर्थ है कि हम भगवान शिव की पूजा करते हैं, जिनके तीन नेत्र हैं, जो सुगंधित हैं और हमारा पोषण करते हैं। जैसे फल शाखा के बंधन से मुक्त हो जाता है वैसे ही हम भी मृत्यु और नश्वरता से मुक्त हो जाएं।

महामृत्युंजय मंत्र जाप का जीवन में क्या प्रभाव पड़ता है ?

इस मन्त्र के जप करने से मानव जीवन में बहुत ही विशेष प्रभवा पड़ता है यह महामृंत्युजय मंत्र बहुत ही बड़ा मंत्र है
इस मंत्र को ही कभी कभी रूद्र मंत्र भी कहा जाता है जो भगवान शिव के उग्र पहलु को भी उल्लेख करता है

इस महामृंत्युजय मंत्र के जप करने से क्या क्या फायदा होता है
1- अपने परिवार में प्रियजनों को भवनात्मक एवं शारीरिक रूप से सुरक्षित रखना
2 – अपने जीवन में सुख समृद्धि आती है
3 – आपके स्वस्थ बहुत अच्छा रहता है इस मंत्र के जप से बीमारिया खत्म हो जाती है
4 – इस मंत्र के जप से चिंता काम होती है

इस महामृंत्युजय मन्त्र के अर्थ को आप ऐसे समजिये –

ओम को ऋग्वेद में नहीं लिखा गया है लेकिन इसे सभी मंत्रों के आरंभ में जोड़ा जाता है जैसा कि ऋग्वेद में गणपति को सम्बोधित करते हुए सभी मन्त्रों में जोड़ा जाता है|
त्रयम्बक का अर्थ भगवान शिव की तीनो आँखों से है त्रय का अर्थ तीन एवम अम्बक का अर्थ आँखे होता है इनमे तीनो आँखों से तातपर्य भगवान ब्रह्मा विष्णु और शिव यह मुख्य देवता है एवं तीन अम्बा का अर्थ होता है माँ शक्ति अर्थार्थ गोरी जी लक्ष्मी जी एवं सरस्वती जी है

त्र्यंबक्कम भगवान शिव की तीन आंखें हैं। त्र्य का अर्थ है तीन और अम्बकम का अर्थ है आंख। ये तीन आँखें ब्रह्मा, विष्णु और शिव रूपी तीन मुख्य देवता हैं। तीन ‘अंबा’ का अर्थ है माँ या शक्ति जो सरस्वती, लक्ष्मी और गौरी हैं। इस प्रकार इस शब्द त्र्यंबक्कम में हम भगवान को ब्रह्मा, विष्णु और शिव के रूप में संदर्भित कर रहे हैं।

यजामहि का अर्थ है, “हम आपकी प्रशंसा गाते हैं”।
सुगंधिम का अर्थ है प्रभु के ज्ञान, उपस्थिति, और शक्ति की सुगंध जो हमेशा हमारे चारों ओर फैली है।
निश्चित रूप से, सुगंध का अर्थ उस आनंद से है जो हमें प्रभु के नैतिक कृत्य को जानने,देखने या महसूस करने से मिलताहै।
पुष्टिवर्धनम से तात्पर्य है कि परमात्मा दुनिया के पोषक करता है अर्थ है की इसलिए वो हम सभी के पिता है
पोषण सभी ज्ञान का आंतरिक भाव भी है और इस प्रकार यह सूर्य भी है और ब्रह्मा का जन्मदाता भी है।
उर्वारोकामवा का अर्थ उर्वा विशाल या बड़ा और शक्तिशाली है। बन्दनायन का अर्थ बँधा हुआ है।
मृत्योर्मुक्षीय का अर्थ है मोक्ष के लिए हमें मृत्यु से मुक्ति देना।
मामृतात है इससे तात्पर्य है की घातक बीमारियों से मृत्यु के साथ साथ इस तरह पुनर जन्म के चक्र से भर निकल सके
‘कृपया मुझे कुछ अमृत दें ताकि घातक बीमारियों से मृत्यु के साथ-साथ पुनरजन्म के चक्र से बाहर निकल सकें।
विशेष लाभ – यह महाम्रत्युन्जय मंत्र जप उज्जैन (Maha Mrityunjaya Jaap in Ujjain) में करवाने से विशेष लाभ की प्राप्ति होती है यह ज्योतिर्लिंग होने के कारण।

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