Kalsarp Dosh Puja Mantra

कालसर्प दोष पूजा मंत्र: प्रभाव, विधि और महत्व

कालसर्प दोष ज्योतिष शास्त्र में एक ऐसा योग माना जाता है जो कुंडली में राहु और केतु की विशेष स्थिति के कारण बनता है। यह दोष व्यक्ति के जीवन में कई तरह की परेशानियां जैसे आर्थिक तंगी, वैवाहिक जीवन में समस्याएं, और करियर में बाधाएं ला सकता है। कालसर्प दोष के प्रभाव को कम करने के लिए पूजा और मंत्रों का जाप एक प्रभावी उपाय माना जाता है। इस लेख में हम कालसर्प दोष पूजा मंत्र, इसकी विधि, और इसके लाभों के बारे में विस्तार से जानेंगे।

कालसर्प दोष क्या है?

कालसर्प दोष तब बनता है जब कुंडली में सभी ग्रह राहु और केतु के बीच में आ जाते हैं। राहु को काल और केतु को सर्प का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इसे “कालसर्प दोष” कहा जाता है। यह दोष 12 प्रकार का होता है, जैसे अनंत, कुलिक, वासुकि, शंखपाल आदि। इसकी वजह से व्यक्ति को मानसिक तनाव, स्वास्थ्य समस्याएं और पारिवारिक कलह का सामना करना पड़ सकता है।

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कालसर्प दोष के लक्षण

  • बार-बार बनते काम बिगड़ना।
  • सपनों में सांप या मृत लोगों का दिखना।
  • आर्थिक स्थिति में अस्थिरता।
  • वैवाहिक जीवन में तनाव और संघर्ष।

कालसर्प दोष पूजा मंत्र

कालसर्प दोष के निवारण के लिए मंत्रों का जाप बहुत प्रभावशाली माना जाता है। ये मंत्र न केवल दोष के प्रभाव को कम करते हैं, बल्कि जीवन में सकारात्मकता भी लाते हैं। नीचे कुछ प्रमुख मंत्र दिए गए हैं:

1. नाग गायत्री मंत्र

  • मंत्र: “ॐ नवकुलाय विद्महे विषदन्ताय धीमहि तन्नो सर्प: प्रचोदयात्।”
  • उपयोग: यह मंत्र नाग देवता को समर्पित है और कालसर्प दोष के प्रभाव को शांत करने में मदद करता है।
  • जाप विधि: सुबह स्नान के बाद रुद्राक्ष की माला से 108 बार जाप करें।

2. महामृत्युंजय मंत्र

  • मंत्र: “ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥”
  • उपयोग: यह भगवान शिव का शक्तिशाली मंत्र है जो सभी प्रकार के दोषों से मुक्ति दिलाता है।
  • जाप विधि: सोमवार को शिवलिंग के सामने बैठकर 108 बार जाप करें।

3. शिव पंचाक्षरी मंत्र

  • मंत्र: “ॐ नमः शिवाय”
  • उपयोग: यह सरल मंत्र कालसर्प दोष के नकारात्मक प्रभाव को कम करने में सहायक है।
  • जाप विधि: रोजाना सुबह-शाम 108 बार जाप करें।

4. राहु-केतु मंत्र

  • राहु मंत्र: “ॐ रां राहवे नमः”
  • केतु मंत्र: “ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः”
  • उपयोग: ये मंत्र राहु और केतु को शांत करने के लिए जपे जाते हैं।
  • जाप विधि: शनिवार या मंगलवार को 108 बार जाप करें।

कालसर्प दोष पूजा की विधि

कालसर्प दोष की शांति के लिए पूजा करना एक प्राचीन और प्रभावी उपाय है। यह पूजा विशेष रूप से उज्जैन, त्र्यंबकेश्वर, और प्रयागराज जैसे पवित्र स्थानों पर की जाती है। नीचे पूजा की सामान्य विधि दी गई है:

पूजा के लिए आवश्यक सामग्री

  • चांदी या सोने से बनी नाग-नागिन की मूर्ति।
  • दूध, जल, और पंचामृत।
  • लाल चंदन, फूल, और बेलपत्र।
  • धूप, दीप, और कपूर।

पूजा की प्रक्रिया

  1. संकल्प: सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूजा का संकल्प लें।
  2. शिव पूजा: शिवलिंग पर दूध और जल से अभिषेक करें।
  3. मंत्र जाप: ऊपर दिए गए मंत्रों में से किसी एक का 108 बार जाप करें।
  4. नाग पूजा: नाग-नागिन की मूर्ति को दूध अर्पित करें और उनकी प्रार्थना करें।
  5. हवन: मंत्रों के साथ हवन करें और अंत में नाग मूर्ति को पवित्र नदी में विसर्जित करें।

कालसर्प दोष पूजा के लाभ

कालसर्प दोष की पूजा और मंत्र जाप से जीवन में कई सकारात्मक बदलाव आते हैं। ये हैं इसके प्रमुख लाभ:

  • मानसिक शांति: तनाव और चिंता से मुक्ति मिलती है।
  • आर्थिक सुधार: धन संबंधी समस्याएं कम होती हैं।
  • पारिवारिक सुख: घर में शांति और समृद्धि बढ़ती है।
  • करियर में सफलता: नौकरी और व्यापार में बाधाएं दूर होती हैं।

कालसर्प दोष पूजा कहां कराएं?

हालांकि कालसर्प दोष की पूजा कहीं भी की जा सकती है, लेकिन कुछ स्थान इसके लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं:

  • उज्जैन: महाकालेश्वर मंदिर में पूजा सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है।
  • त्र्यंबकेश्वर: नासिक में स्थित यह स्थान भी लोकप्रिय है।
  • प्रयागराज: नाग वासुकी मंदिर में पूजा से दोष मुक्ति की मान्यता है।

निष्कर्ष

कालसर्प दोष एक ज्योतिषीय समस्या है जिसका प्रभाव व्यक्ति के जीवन को प्रभावित कर सकता है, लेकिन सही पूजा और मंत्रों के जाप से इसे कम किया जा सकता है। नाग गायत्री मंत्र, महामृत्युंजय मंत्र, और शिव पंचाक्षरी मंत्र जैसे शक्तिशाली मंत्र इस दोष से मुक्ति दिलाने में सहायक हैं। यदि आप भी इस दोष से परेशान हैं, तो किसी अनुभवी ज्योतिषी से सलाह लें और पूजा विधि को अपनाएं। इससे आपके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आएगी।

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