उज्जैन पूजा मुहूर्त — अमावस्या और पूर्णिमा
अमावस्या तिथि
कालसर्प दोष की शांति और पितृ कर्म — दोनों के लिए अमावस्या शास्त्रों में विशेष मानी गई है।
| दिन | तिथि प्रारंभ → समाप्त (IST) | सूर्योदय |
|---|---|---|
| Friday, 11 September 2026 | 10:33 AM on 2026-09-10 → 8:57 AM on 2026-09-11 | 6:13 AM |
| Saturday, 10 October 2026 | 9:35 PM on 2026-10-09 → 9:20 PM on 2026-10-10 | 6:22 AM |
| Monday, 9 November 2026 | 11:27 AM on 2026-11-08 → 12:31 PM on 2026-11-09 | 6:37 AM |
| Tuesday, 8 December 2026 | 4:12 AM on 2026-12-08 → 6:21 AM on 2026-12-09 | 6:57 AM |
| Thursday, 7 January 2027 | 11:14 PM on 2027-01-06 → 1:54 AM on 2027-01-08 | 7:10 AM |
| Saturday, 6 February 2027 | 7:05 PM on 2027-02-05 → 9:25 PM on 2027-02-06 | 7:06 AM |
| Monday, 8 March 2027 | 1:46 PM on 2027-03-07 → 2:59 PM on 2027-03-08 | 6:44 AM |
| Tuesday, 6 April 2027 | 5:40 AM on 2027-04-06 → 5:21 AM on 2027-04-07 | 6:16 AM |
| Thursday, 6 May 2027 | 6:16 PM on 2027-05-05 → 4:28 PM on 2027-05-06 | 5:52 AM |
| Friday, 4 June 2027 | 4:05 AM on 2027-06-04 → 1:10 AM on 2027-06-05 | 5:41 AM |
| Sunday, 4 July 2027 | 12:05 PM on 2027-07-03 → 8:32 AM on 2027-07-04 | 5:46 AM |
| Monday, 2 August 2027 | 7:20 PM on 2027-08-01 → 3:35 PM on 2027-08-02 | 5:58 AM |
| Tuesday, 31 August 2027 | 2:41 AM on 2027-08-31 → 11:11 PM on 2027-08-31 | 6:09 AM |
| Thursday, 30 September 2027 | 10:55 AM on 2027-09-29 → 8:06 AM on 2027-09-30 | 6:19 AM |
| Friday, 29 October 2027 | 8:48 PM on 2027-10-28 → 7:06 PM on 2027-10-29 | 6:31 AM |
| Sunday, 28 November 2027 | 9:07 AM on 2027-11-27 → 8:54 AM on 2027-11-28 | 6:50 AM |
| Monday, 27 December 2027 | 12:22 AM on 2027-12-27 → 1:42 AM on 2027-12-28 | 7:07 AM |
| Wednesday, 26 January 2028 | 6:17 PM on 2028-01-25 → 8:42 PM on 2028-01-26 | 7:10 AM |
| Friday, 25 February 2028 | 1:26 PM on 2028-02-24 → 4:07 PM on 2028-02-25 | 6:54 AM |
| Sunday, 26 March 2028 | 7:56 AM on 2028-03-25 → 10:01 AM on 2028-03-26 | 6:26 AM |
| Monday, 24 April 2028 | 12:20 AM on 2028-04-24 → 1:17 AM on 2028-04-25 | 5:59 AM |
| Wednesday, 24 May 2028 | 2:10 PM on 2028-05-23 → 1:46 PM on 2028-05-24 | 5:43 AM |
| Thursday, 22 June 2028 | 1:38 AM on 2028-06-22 → 11:57 PM on 2028-06-22 | 5:43 AM |
| Saturday, 22 July 2028 | 11:18 AM on 2028-07-21 → 8:31 AM on 2028-07-22 | 5:54 AM |
| Sunday, 20 August 2028 | 7:47 PM on 2028-08-19 → 4:13 PM on 2028-08-20 | 6:06 AM |
पूर्णिमा तिथि
सत्यनारायण कथा, रुद्राभिषेक और अनेक व्रत पूर्णिमा पर किए जाते हैं। चैत्र पूर्णिमा पर हनुमान जयंती आती है।
| दिन | तिथि प्रारंभ → समाप्त (IST) | सूर्योदय |
|---|---|---|
| Saturday, 26 September 2026 | 11:06 PM on 2026-09-25 → 10:18 PM on 2026-09-26 | 6:17 AM |
| Monday, 26 October 2026 | 11:56 AM on 2026-10-25 → 9:41 AM on 2026-10-26 | 6:29 AM |
| Tuesday, 24 November 2026 | 11:42 PM on 2026-11-23 → 8:23 PM on 2026-11-24 | 6:47 AM |
| Friday, 22 January 2027 | 9:30 PM on 2027-01-21 → 5:47 PM on 2027-01-22 | 7:10 AM |
| Monday, 22 March 2027 | 6:21 PM on 2027-03-21 → 4:13 PM on 2027-03-22 | 6:30 AM |
| Tuesday, 20 April 2027 | 4:51 AM on 2027-04-20 → 3:57 AM on 2027-04-21 | 6:03 AM |
| Thursday, 20 May 2027 | 4:03 PM on 2027-05-19 → 4:28 PM on 2027-05-20 | 5:45 AM |
| Friday, 18 June 2027 | 4:34 AM on 2027-06-18 → 6:14 AM on 2027-06-19 | 5:42 AM |
| Saturday, 19 June 2027 | 4:35 AM on 2027-06-18 → 6:14 AM on 2027-06-19 | 5:42 AM |
| Sunday, 18 July 2027 | 6:48 PM on 2027-07-17 → 9:15 PM on 2027-07-18 | 5:52 AM |
| Tuesday, 17 August 2027 | 10:28 AM on 2027-08-16 → 12:58 PM on 2027-08-17 | 6:04 AM |
| Wednesday, 15 September 2027 | 2:48 AM on 2027-09-15 → 4:33 AM on 2027-09-16 | 6:14 AM |
| Friday, 15 October 2027 | 6:49 PM on 2027-10-14 → 7:17 PM on 2027-10-15 | 6:24 AM |
| Sunday, 14 November 2027 | 9:55 AM on 2027-11-13 → 8:55 AM on 2027-11-14 | 6:40 AM |
| Monday, 13 December 2027 | 11:55 PM on 2027-12-12 → 9:38 PM on 2027-12-13 | 7:00 AM |
| Wednesday, 12 January 2028 | 12:45 PM on 2028-01-11 → 9:33 AM on 2028-01-12 | 7:11 AM |
| Thursday, 10 February 2028 | 12:17 AM on 2028-02-10 → 8:33 PM on 2028-02-10 | 7:04 AM |
| Sunday, 9 April 2028 | 7:11 PM on 2028-04-08 → 3:56 PM on 2028-04-09 | 6:12 AM |
| Monday, 8 May 2028 | 3:32 AM on 2028-05-08 → 1:19 AM on 2028-05-09 | 5:50 AM |
| Wednesday, 7 June 2028 | 12:29 PM on 2028-06-06 → 11:38 AM on 2028-06-07 | 5:41 AM |
| Thursday, 6 July 2028 | 11:04 PM on 2028-07-05 → 11:40 PM on 2028-07-06 | 5:47 AM |
| Saturday, 5 August 2028 | 11:51 AM on 2028-08-04 → 1:40 PM on 2028-08-05 | 6:00 AM |
| Sunday, 3 September 2028 | 2:52 AM on 2028-09-03 → 5:17 AM on 2028-09-04 | 6:11 AM |
तारीख़ें पंचांगों में अलग क्यों निकलती हैं
तिथि खगोलीय रूप से एक ही होती है — बदलता यह है कि उसे किस क्षण देखा जाए। अधिकांश तिथियाँ उदया-व्यापिनी नियम से, यानी सूर्योदय पर चल रही तिथि के आधार पर दिन को दी जाती हैं, और यही नियम ऊपर की तालिका में लगाया गया है।
पर हर पर्व इसी नियम से नहीं चलता। महाशिवरात्रि निशीथ काल यानी अर्धरात्रि में चल रही कृष्ण चतुर्दशी से तय होती है, इसलिए वह सूर्योदय वाले नियम से निकाली गई तारीख़ से एक दिन अलग पड़ सकती है। श्राद्ध कर्म अपराह्न काल से तय होता है। और नागपंचमी अधिक मास वाले वर्ष में निज श्रावण की शुक्ल पंचमी पर आती है, अधिक मास की नहीं।
इसीलिए इस पृष्ठ पर केवल अमावस्या और पूर्णिमा दी गई हैं — इन दोनों का अंत एक निश्चित खगोलीय क्षण है जिसे स्वतंत्र रूप से जाँचा जा सकता है। पर्व की तिथि आपके पंचांग के अनुसार पंडित जी के साथ तय की जाती है।
किस पूजा के लिए कौन सी तिथि
| पूजा | तिथि / काल |
|---|---|
| कालसर्प दोष निवारण | नागपंचमी, अमावस्या, पंचमी |
| पितृ दोष, पिंड दान | पितृ पक्ष, पूर्वज की तिथि, अमावस्या |
| मंगल दोष (भात पूजा) | मंगलवार, मंगल की होरा |
| महामृत्युंजय जाप, रुद्राभिषेक | सोमवार, प्रदोष, शिवरात्रि |
| नवग्रह शांति | ग्रह की होरा और उसका वार |
सामान्य प्रश्न
कालसर्प दोष पूजा के लिए कौन सी तिथि उपयुक्त मानी जाती है?
शास्त्रों में नागपंचमी, अमावस्या और पंचमी तिथि इस अनुष्ठान के लिए उपयुक्त बताई गई है। उज्जैन की अगली अमावस्या तिथियाँ इसी पृष्ठ की तालिका में दी गई हैं। कौन सी तिथि आपकी कुंडली के लिए ठीक है, यह दोष का प्रकार देखकर पंडित जी तय करते हैं।
पितृ कर्म और पिंड दान किस तिथि पर किया जाता है?
पितृ पक्ष में, और पूर्वज की तिथि पर। अमावस्या इसके लिए विशेष मानी जाती है। ध्यान रहे कि श्राद्ध कर्म की तिथि अपराह्न-व्यापिनी नियम से तय होती है, सूर्योदय से नहीं — इसलिए श्राद्ध का दिन इस तालिका से एक दिन आगे-पीछे हो सकता है।
दो पंचांगों में एक ही पर्व की तारीख अलग क्यों होती है?
क्योंकि हर पर्व एक ही नियम से तय नहीं होता। कुछ तिथियाँ सूर्योदय पर देखी जाती हैं (उदया-व्यापिनी), महाशिवरात्रि निशीथ काल यानी अर्धरात्रि पर, और श्राद्ध अपराह्न काल पर। तिथि खगोलीय रूप से एक ही होती है; नियम अलग होने से दिन अलग निकल आता है।
क्या पूजा के लिए उज्जैन आना ज़रूरी है?
नहीं। संकल्प आपके नाम और गोत्र से किया जाता है और पंडित जी नियत तिथि पर पूजा स्थल पर विधि सम्पन्न करते हैं। भारत के अन्य शहरों और विदेश में रहने वाले परिवार इसी तरह बुकिंग करते हैं।
ये तिथियाँ किस आधार पर निकाली गई हैं?
उज्जैन के सूर्योदय पर चलने वाली तिथि के आधार पर (उदया-व्यापिनी)। तिथि के समाप्त होने का सटीक समय स्वतंत्र रूप से खगोलीय गणना से निकाला गया है — अमावस्या का अंत अमावस्यांत (new moon) पर और पूर्णिमा का अंत पूर्ण चंद्र पर होता है। दोनों विधियाँ पाँच मिनट से अधिक अलग हों तो यह पृष्ठ बनता ही नहीं।
तिथि देखकर मुहूर्त तय करना आधा काम है — दूसरा आधा कुंडली है। किस विधि की आवश्यकता है यह दोष का प्रकार और ग्रह स्थिति देखकर तय होता है, इसलिए पंडित जी पहले कुंडली देखते हैं। +91 89895 40544 पर बात कर के तिथि की पुष्टि करा लें।
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