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काल सर्प दोष पूजा 

काल सर्प दोष पूजा कहा होती है -
हमारे सनातन धर्म में पृथिवी की भौगोलिक स्थिति के अनुसार प्रत्येक स्थान का अपना एक अलग महत्त्व है, भले ही भिन्न भिन्न स्थानों पर एक ही परमेश्वर के स्वरूप की स्थापना की गयी हो। 
जैसे अमरनाथ में विराजमान भगवान शिवजी के दर्शन का अलग महत्त्व है और रामेश्वरम में विराजमान भगवान के श्री विग्रह का अलग महत्व है, इसी प्रकार वैष्णो देवी जो कटरा में विराजमान है उनका ही भिन्न स्वरूप कामाख्या देवी और कालका माता के रूप में है, किन्तु स्थान विशेष के अनुसार पूजन और फल की अभिलाषा भिन्न भिन्न हो जाती है। 
अब हम बात करते है काल सर्प दोष की, तो सबसे पहले तो ये जान लेना जरुरी है की आपकी कुंडली में या फिर आप जिसकी कुंडली में काल सर्प योग से भयभीत है उसकी कुंडली में काल सर्प दोष है भी या नहीं, काल सर्प दोष में ग्रहो की स्थिति वक्र हो जाती है और वही कारण बनती है। 
काल सर्प योग एवं इसके प्रकार 
काल सर्प योग में मुख्य ग्रह अथवा सभी ग्रह राहु एवं केतु के मध्य में आ जाते है तो यह ग्रह निष्क्रिय हो जाते है और मनुस्य को अभीष्ट फल प्राप्ति नहीं होती है, मुख्या रूप से काल सर्प दोष बारह प्रकार का होता है जो निम्न प्रकार से है:

1.जैसे जब राहु लग्न में व केतु सप्तम में हो तो अनन्त नामक कालसर्प योग बनता है,
2.जब राहु दूसरे घर में हो और केतु अष्टम स्थान में हो तो कुलिक नाम कालसर्प योग होगा, 
3.जब राहु तीसरे घर में और केतु नवम स्थान में हो तो वासुकी नामक कालसर्प योग बनता है, 
4.राहु चौथे स्थान में और केतु दशम स्थान में तो शंखपाल नामक कालसर्प योग बनता है,  
5.राहु पंचम व केतु एकादश भाव में हों तो पद्म कालसर्प योग बनता है, 
6.जब राहु छठे भाव में और केतु बारहवे भाव में हों तो महापद्म कालसर्प योग बनता है, जब केतु लग्न में और राहु सप्तम स्थान में हो तो तक्षक नामक कालसर्प योग बनता है, 
7.जब केतु दूसरे स्थान में और राहु अष्टम स्थान में हो तो कर्कोटक नाम कालसर्प योग बनता है, 
8.जब केतु तीसरे स्थान में व राहु नवम स्थान में हो तो शंखचूड़ नामक कालसप्र योग बनता है, 
9.जब केतु चतुर्थ तथा राहु दशम स्थान में हो तो घातक कालसर्प योग बनाते हैं, 
10.जब केतु पंचम और राहु ग्यारहवे भाव में हो तो विषधर कालसर्प योग बनाते हैं, 
11.जब केतु छठे और राहु बारहवे भाव में हो तो शेषनाग कालसर्प योग बनता है
काल सर्प दोष पूजन क्यों करवाए 
वैसे तो पूजन हम क्यों करवाए जैसे प्रश्न पूछने ही नहीं चाहिए किन्तु आज के भौतिकवादी समय में कभी कभी मन में अनायास ही प्रश्न उठ जाता है की हम ये पूजा क्यों करवाए ? तो कुछ संक्षेप में हम बता रहे है की ये कारण विशेष के लिए आपको काल सर्प दोष निवारण पूजा जरूर करवानी चाहिए :
1.एक खुशहाल एवं समृद्ध जीवन जीने के लिए 
2.सुखद वैवाहिक जीवन का आनंद लेने के लिए 
3.व्यावसायिक जीवन व कार्य के क्षेत्र में उन्नति के लिए 
4.आर्थिक बाधाओं से मुक्ति प्राप्त करने के लिए 
5.जीवन के संतुलन एवं शान्ति बनाये रखने के लिए 
6.सभी विकारों से दूर रहते हुए एक निरोग जीवन जीने के लिए 
7.अपने सभी सगी सम्भान्धियों का साथ बना रहे 

ये कुछ मुख्या कारण है, बाकी और भी अन्यान्य कारण है जो समय आने पर स्वतः मन को समझा बल प्रदान करते है।
कालसर्प दोष योग पूजा कहा करवानी चाहिए 
भगवान शिव जिनको हम भक्तजन महाकाल कहते है उनका विश्वप्रसिद्ध मंदिर उज्जैन में है, उज्जैयनी जिसे हम अवंतिका के नाम से भी जानते है जो न्याय प्रिय शासक महाराज विक्रमादित्य के लिए भी जानी जाती है, जब हम काल सर्प दोष से पीड़ित हो तो हमे सिर्फ महाकाल की ही शरण में जाना चहिये अर्थात उज्जैन में आना चाहिए क्युकी तीर्थो की परिभाषा में भी उज्जैन को विशेष स्थान प्राप्त है। 
वैसे काल सर्प दोष निवारण पूजा उज्जैन के अलाबा त्रिंबकेश्वर और वारणशी में भी होती है, और यह भी फलदायी है, किन्तु उज्जैन में पूजन का अपना विशेष महत्त्व है क्युकी यहाँ पर  बारहो प्रकार के काल सर्प दोष का निवारण सम्भव है। 
उज्जैन में भी पूजन आपको सदाचारी, सात्विक और संतुस्ट ब्राह्मण से ही करवाना चाहिए, धनलोलुप और असंयमी ब्राह्मण से पूजन कदाचिन करवाए, उज्जैन के सभी सदाचारी, संतुस्ट, संयमी, सात्विक ब्राह्मणो की शत प्रतिशत जानकारी हमसे निशुल्क प्राप्त करिये। 

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